गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री, श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा शुरू की गई एक शानदार पहल के तहत, जेनबर्क्ट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने जेनबर्क्ट “आशा” वैन (चलती-फिरती उम्मीद की किरण) तैयार करके उसे दान किया है। यह भारत की पहली ऐसी मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग वैन है, जिसमें 10 अलग-अलग तरह के कैंसर की जाँच के लिए तमाम अत्याधुनिक सुविधाएँ मौजूद हैं। इस मोबाइल वैन का प्रबंधन और रखरखाव भावनगर जिले की इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा किया जाता है। साल 2040 तक भारत में कैंसर के संभावित 2.08 मिलियन मामलों की चुनौती का सामना करने और सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 3.8 को पूरा करने की दिशा में शुरू की गई यह पहला सच में बेमिसाल है।

जेनबर्क्ट आशा वैन तुरंत और सटीक परिणाम देने वाली ऐसी एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सुविधाओं को सभी के लिए सुलभ बनाकर स्वास्थ्य-सेवा के क्षेत्र में असमानता को दूर करती है, जो पहले केवल भारत के बड़े अस्पतालों तक ही सीमित थे। यह वैन स्तन, सर्वाइकल, मुंह, खून, प्रोस्टेट, टेस्टिकुलर, पैंक्रियाटिक, लिवर, कोलोरेक्टल और फेफड़ों के कैंसर जैसे 10 तरह के गंभीर कैंसर की जाँच में सक्षम है। विश्व स्तरीय ईवीए-प्रो डायग्नोस्टिक मशीनों, सीआर सिस्टम वाली पूरी मैमोग्राफी यूनिट, थर्मोग्रिड टेक्नोलॉजी और आधुनिक आईटी सुविधाओं से लैस ये शानदार वैन ग्रामीण इलाके के लोगों को सही समय पर जान बचाने वाली डायग्नोसिस की सुविधा उपलब्ध कराती है।
इस वैन को लोगों में चिंता के बजाय उम्मीद जगाने के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है जिसके अंदर का माहौल गर्मजोशी भरा और हिम्मत देने वाला है, ताकि अस्पताल जैसी नीरस जगह के बजाय जाँच के दौरान लोगों को सम्मान और सुकून महसूस हो सके। इस वैन में कैंसर देखभाल की पूरी सुविधा मौजूद है: जिसके अंतर्गत विशेषज्ञों की टीम द्वारा मौके पर ही जाँच, रिपोर्ट के असामान्य नतीजों पर तुरंत सलाह, अहमदाबाद, वडोदरा तथा सूरत के ऑन्कोलॉजिस्ट से 24 घंटे परामर्श की सुविधा, आगे के इलाज के लिए रेफरल में सहायता और फोन पर लगातार टेली-काउंसलिंग सेवाएँ शामिल हैं। तमाम सुविधाओं को शामिल करने वाली इस प्रक्रिया में जाँच को अलग नहीं माना जाता, बल्कि इसे हर लिहाज से अच्छी सेहत के सफर के पहले कदम के तौर पर देखा जाता है।
गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री, श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, साल 2021 से 2025 के बीच कैंसर के 2,106 से ज्यादा मरीजों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 31.55 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई, और इस तरह कैंसर के उपचार को सुलभ बनाने में गुजरात सबसे आगे निकल गया है। उद्घाटन के अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए माननीय मुख्यमंत्री ने कहा, “पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र में मुंह के कैंसर के मामले बहुत ज़्यादा हैं, इसलिए रोकथाम और शुरुआत में जाँच के लिहाज से यह पहल बेहद मूल्यवान है। साथ ही, अगर इस मोबाइल वैन को गुजरात के अलग-अलग जिलों में तैनात किया जाए, तो इससे समय रहते बीमारी का पता लगाने और इलाज शुरू करने से नागरिकों को बहुत फायदा होगा। मैं इस शानदार पहल की शुरुआत के लिए जेनबर्क्ट की पूरी टीम को बधाई देता हूँ।”
जेनबर्क्ट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री आशीष यू भूटा ने ज़ोर देकर कहा, “कैंसर कभी भी इलाके के आधार पर भेदभाव नहीं करता, लेकिन जान बचाने वाली जाँच सुविधाओं का मिलना जरूर इलाके पर निर्भर है। ग्रामीण सौराष्ट्र के एक किसान को भी शुरुआत में बीमारी की पहचान की वही अत्याधुनिक सुविधाएँ मिलनी चाहिए, जो मुंबई के बड़े अस्पतालों में उपलब्ध हैं। जेनबर्क्ट में, हम मरीजों को सबसे ज्यादा अहमियत देने के संकल्प पर अटल हैं और गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते, खासकर तब जब ज़िंदगी दांव पर लगी हो। जेनबर्क्ट आशा वैन हमारे उस संकल्प का प्रतीक है जिसमें हम बेहतरीन सुविधाएँ देने का वादा करते हैं, जिसमें जाँच की वही उच्च स्तरीय तकनीक इस्तेमाल की गई है जो भारत के बड़े कैंसर संस्थानों में मौजूद है। इसकी वजह यह है कि, अनुमानित तौर पर 20 लाख से ज़्यादा मामले उन माताओं, पिताओं और घर चलाने वालों के हैं, जिन्हें सही समय पर इलाज मिलने से उनके परिवार की खुशहाली बनी रहेगी या फिर देरी से बीमारी का पता चलने पर परिवार इलाज के भारी खर्च की वजह से कर्ज में डूब जाएगा।”
देश भर के मौजूदा पैटर्न बताते हैं कि 40% से ज़्यादा मामलों का देर से पता चलता है।²गुजरात के ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि डायग्नोस्टिक की आधुनिक सुविधाएँ बड़े शहरों तक ही सीमित हैं, जिससे उन्हें बीमारी का पता देर से चलने का खतरा बना रहता है। भारत में संक्रामक रोगों की तुलना में कैंसर के इलाज के लिए भारी जेब खर्च के कारण गरीबी की स्थिति में पहुँचने की संभावना 6 गुना अधिक है।⁷जेनबर्क्ट आशा वैन का असर सिर्फ आसानी से इलाज मिलने तक सीमित नहीं है। स्तन कैंसर के अंतिम चरण में पाँच साल तक जीवित रहने की दर 15% होती है, जबकि जल्दी पता चलने पर यह दर 90% से ज़्यादा हो जाती है।⁸ सर्वाइकल कैंसर के मामले में, पहले चरण में पता चलने पर जीवित रहने की दर 78% होती है, जबकि चौथे चरण तक पहुँचने पर यह उम्मीद घटकर सिर्फ 9% ही बचती है।⁹ ये आँकड़े उन हज़ारों माताओं, पिताओं और घर चलाने वाले लोगों को दर्शाते हैं, जिन्हें सही समय पर इलाज मिलने से या तो उनका परिवार सुरक्षित रहेगा, या फिर बीमारी का पता देर से चलने के कारण उनका परिवार तबाह हो जाएगा।
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, भावनगर के अध्यक्ष, डॉ. मिलन दवे ने इस पहल की बदलाव लाने वाली क्षमता पर ज़ोर देते हुए कहा: “यह वैन ग्रामीण भारत में कैंसर के उपचार के हमारे तरीके में बड़े पैमाने पर बदलाव का प्रतीक है। इस पहल ने उन लोगों के स्वाभिमान और उनकी उम्मीदों को बरकरार रखा है, जिन्हें पहले आर्थिक रूप से तबाह होने या इलाज कराने के बीच मुश्किल विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता था। कैंसर की जाँच के असर पर किए गए अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि, इस तरह के मोबाइल स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के जरिए जाँच किए गए हर 1,000 लोगों को 7 से 12 साल की अतिरिक्त जिंदगी मिल सकती है। इसका मतलब है कि भावनगर जिले में हर साल सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकती है।”
जेनबर्क्ट फार्मास्युटिकल्स मुख्यालय मुंबई में स्थित है और यह 40 से ज़्यादा सालों से गुजरात के सिहोर में एक अत्याधुनिक प्लांट और R&D सेंटर का संचालन कर रहा है। जेनबर्क्ट ने बेहतरीन गुणवत्ता, इनोवेशन, और नैतिक मूल्यों के साथ मार्केटिंग के बल पर अपनी पहचान बनाई है, तथा बिल्कुल नई रिसर्च के सहारे दुनिया में पहली बार पेश किए जाने वाले कई प्रोडक्ट्स तैयार किए हैं। श्री आशीष यू भूटा कहते हैं, “हम मानते हैं कि फार्मास्युटिकल कंपनियों की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ दवा बनाना नहीं है, बल्कि उन समुदायों की बुनियाद को मज़बूत करना भी है जहाँ हम काम करते हैं। अगर हम एक भी ग्रामीण परिवार को इलाज के खर्च की वजह से कर्ज में डूबने से बचा लें, या बीमारी की शुरुआत में पहचान से किसी माँ की जान बचा सकें, तो यह समाज की आर्थिक और सामाजिक मजबूती के लिए हमारी ओर से किया गया निवेश होगा।”
यह पहल गुजरात में जेनबर्क्ट द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए हेल्थकेयर इनोवेशन के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड पर आधारित है। कंपनी ने साल 2019 में भावनगर में श्री उत्तम एन. भूटा रेड क्रॉस ब्लड सेंटर के साथ रक्तदान के क्षेत्र में बदलाव लाया, और यहाँ ज़ीरो रिप्लेसमेंट पॉलिसी लागू की। इस तरह मरीज के परिवार वालों को रक्तदाताओं का इंतजाम करने की जरूरत खत्म हो गई। साल 2024 में मोबाइल हेल्थ वैन की शुरुआत की गई, जो पूरे गुजरात के ग्रामीण इलाकों में 13 से ज़्यादा डायग्नोस्टिक जाँच की सुविधा मुहैया कराती है, और इस मोबाइल वैन ने अपने पहले ही साल में 15,000 से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाकर एक बड़ा बदलाव लाया है।
पूरे भावनगर जिले में ये सेवाएँ मुफ्त या बहुत ही कम शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पहल के तहत जन्मदिन, शादी की सालगिरह और पुण्यतिथि जैसे अवसरों पर आयोजित होने वाले मुफ्त जाँच शिविरों के लिए विशेष व्यवस्था भी शामिल हैं। कंपनियाँ, संगठन और समुदाय के अलग-अलग समूह ‘तिथि दान’ (श्रद्धांजलि के तौर पर दान) कार्यक्रमों के ज़रिए जाँच शिविर आयोजित कर सकते हैं, जो एक ऐसा बेहतरीन तरीका है जिससे दिवंगत परिजनों को श्रद्धांजलि भी दी जा सकती है और समुदाय के जीवित लोगों को बीमारी से बचाया भी जा सकता है।
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, भावनगर जिला शाखा के उपाध्यक्ष, श्री सुमित ठक्कर ने कहा: “पिछले कुछ सालों में जेनबर्क्ट के साथ हमारी साझेदारी से भावनगर के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ऐसा बदलाव आया है, जो पहले कभी नहीं हुआ। इस मोबाइल वैन ने राज्य के ऐसे इलाकों में आधुनिक जाँच सुविधाएँ पहुँचाकर पूरी तस्वीर बदल दी है, जहां के लोगों के पास पारंपरिक रूप से ऐसी आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता काफी सीमित थी।”


