अहमदाबाद, (पवन माकन)। शहर के सबसे पॉश और वीआईपी इलाके बोडकदेव में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बोडकदेव पुलिस स्टेशन से पत्थर फेंकने की दूरी पर स्थित “एक्यम स्पा” अब मसाज के लिए नहीं, बल्कि हाई-प्रोफाइल ‘देह व्यापार’ के अड्डे के रूप में बदनाम हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि जिस इलाके की सुरक्षा का जिम्मा पुलिस पर है, उसी पुलिस की नाक के नीचे विदेशी बालाओं का यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।

पुलिस की संलिप्तता पर गहराता शक
स्थानीय हलकों में चर्चा गरम है कि यह धंधा बिना ‘खाकी’ के आशीर्वाद के संभव नहीं है। आरोप लग रहे हैं कि पुलिस के आला अधिकारी और संबंधित बीट के कर्मचारी इस अवैध धंधे से ‘मोटा हफ्ता’ वसूल रहे हैं। यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस की गाड़ियां इस स्पा के बाहर से सायरन बजाते हुए निकल जाती हैं, लेकिन अंदर झांकने की हिम्मत नहीं जुटातीं। क्या पुलिस का काम केवल अपराधियों को संरक्षण देना रह गया है?
थाईलैंड कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
सूत्रों का दावा है कि ‘एक्यम स्पा’ में केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि थाईलैंड और अन्य देशों की युवतियों को अवैध रूप से लाया गया है। ‘स्पेशल सर्विस’ के नाम पर यहां ग्राहकों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। सवाल यह है कि:
- क्या इन विदेशी युवतियों के पास वैध वर्क वीजा है?
- क्या पुलिस ने कभी इनके दस्तावेजों की जांच करने की जहमत उठाई?
- या फिर ‘ऊपर तक’ पहुंचने वाले पैसों ने पुलिस की आंखों पर पट्टी बांध दी है?
सिस्टम को आईना दिखाते तीखे सवाल - थाने से चंद कदमों की दूरी पर चल रहे इस ‘अड्डे’ की जानकारी पुलिस को क्यों नहीं? क्या यह इंटेलिजेंस की विफलता है या जानबूझकर की गई अनदेखी?
- क्या बोडकदेव पुलिस ‘मोटा माल’ लेकर इस अवैध साम्राज्य की चौकीदारी कर रही है?
- छापेमारी के नाम पर केवल खानापूर्ति क्यों की जाती है? असली सरगनाओं पर हाथ डालने से पुलिस क्यों डरती है?
- पॉश इलाके में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा और मर्यादा का क्या? क्या प्रशासन ने इसे नीलाम कर दिया है?
जनता का आक्रोश: अब आर-पार की लड़ाई
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही इस स्पा के बाहर संदिग्ध लोगों और लग्जरी गाड़ियों का तांता लग जाता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने अपनी ‘हफ्ता वसूली’ बंद कर इस अड्डे पर ताला नहीं जड़ा, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल एक स्पा का नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट तंत्र का है जो चंद रुपयों के लिए शहर की सुरक्षा और संस्कृति को दांव पर लगा रहा है। अब देखना यह है कि क्या अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर इस ‘मिलीभगत’ को तोड़ते हैं या बोडकदेव पुलिस इसी तरह अपराधियों की ‘कवच’ बनी रहेगी।


