आज शिक्षा और स्वास्थ्य पर कोई भी राजनीतिक पार्टियां चर्चा नही करना चाहती बस देखने में यही आ रहा है कि सिर्फ हिंदू मुस्लिम तक ही राजनीति हो रही हैं और छोटे मासूम बच्चों तक में हिंदू मुस्लिम की भावना नजर आने लगी है!अगर भविष्य में यही रहा तो हमारी जनरेशन का क्या होगा! आजनशिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की जरूरत हर कोई महसूस कर रहा है लेकिन दोनों ही आम आदमी की आर्थिक क्षमता से बाहर होते जा रहे हैं! स्वास्थ्य और शिक्षा आज के समय में दो ऐसे विषय हैं जो समाज में बहुत ही बड़ी आवश्यकता बन गए हैं! ज्ञान प्राप्त करना है तो उसका साधन तो शरीर ही है। स्वस्थ शरीर सब कुछ कर सकता है। अस्वस्थ शरीर कुछ भी नहीं कर सकता है। वह बस केवल इच्छा ही कर सकता है। इसलिए स्वास्थ्य भी बहुत ही जरूरी है साथ ही शिक्षा भी हम सब देखते हैं कि एक आदमी इसके लिए अपना घर तक बेच देगा लेकिन अच्छी शिक्षा में अपने बच्चों को भेजेगा। अपना घर बेच देगा लेकिन अच्छी जगह अपनी चिकित्सा हो या शिक्षा इसका प्रबंध करेगा। सबसे अधिक आवश्यकता सब को प्रतीत होती है स्वास्थ्य और शिक्षा की लेकिन दुर्भाग्य ऐसा है कि ये दोनों बातें आज सामान्य व्यक्ति के पहुंच से बाहर है और देश में सिर्फ हिंदू मुस्लिम में खाई की तरह बाटी जा रही है!जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी राष्ट्र के सशक्त भविष्य और असली ताकत होते हैं, जो नागरिकों को सक्षम बनाते हैं!यह भी एक आम चिंता है कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बजाय, राजनीतिक दल अक्सर हिंदू-मुस्लिम विभाजन जैसे मुद्दों को हवा देकर अपनी सत्ता की भूख शांत करते हैं, जिससे देश का वास्तविक विकास रुक जाता है!अक्सर, सत्ता हासिल करने के लिए समाज को बांटने वाले मुद्दे (जैसे हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण) शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे वास्तविक विकास के मुद्दों से ऊपर आ जाते हैं!इसके लिए जिम्मेवार कौन हैं..?



