गांधीनगर, 19 जनवरी : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र का अनुकरण करते हुए गुजरात सरकार द्वारा स्थापित स्टोन आर्टिजन पार्क ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट यानी ‘एसएपीटीआई/साप्ति’ राज्य के पत्थर शिल्पकला क्षेत्र में कौशल विकास को वेग दे रहा है। यह संस्थान पत्थर कला की मूल्यवान विरासत को बनाए रखने के साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। दिसंबर-2025 तक कुल 674 उम्मीदवार इस संस्थान से स्नातक हुए हैं।
गुजरात में अंबाजी तथा ध्रांगध्रा में हैं आर्टिजन पार्क
उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार के खान एवं उद्योग विभाग तथा भूविज्ञान एवं खनन कार्य आयुक्त कार्यालय-गांधीनगर द्वारा स्थापित साप्ति राज्य के शिल्पकला उद्योग की संभावनाओं का उपयोग करता है और पत्थर कला तथा शिल्प-स्थापत्य की मूल्यवान विरासत को आगे बढ़ा रहा है। राज्य में अंबाजी (बनासकाँठा जिला) और ध्रांगध्रा (सुरेन्द्रनगर जिला) में – दो आर्टिजन पार्क्स की स्थापना की गई है। उत्तर गुजरात में स्थित साप्ति-अंबाजी संगमरमर के शिल्पों पर ध्यान केन्द्रित करता है, जबकि गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थापित साप्ति-ध्रांगध्रा रेत-पत्थर के शिल्पों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
गुजरात में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में आज साप्ति जैसा संस्थान सांस्कृतिक धरोहर को रोजगार के अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

2022 से 2025 के दौरान साप्ति के दोनों केन्द्रों पर 1,082 उम्मीदवारों का पंजीकरण हुआ
2022 से 2025 के दौरान साप्ति के दोनों केन्द्रों पर 1,082 उम्मीदवारों का पंजीकरण हुआ है। 26 दिसंबर, 2025 तक कुल 674 उम्मीदवार इस संस्थान से स्नातक हुए हैं, जिनमें अंबाजी केन्द्र के 307 उम्मीदवार तथा ध्रांगध्रा केन्द्र के 367 उम्मीदवार शामिल हैं। ये आँकड़े गुजरात के शिल्प उद्योग के लिए कुशल कार्यबल का निर्माण करने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका दर्शाते हैं।
साप्ति के माध्यम से ध्रांगध्रा के युवक अक्षय पिलाणी बने शिल्पकला में पारंग, प्रतिमाह करते हैं 40,000 रुपए की कमाई
सुरेन्द्रनगर जिले की ध्रांगध्रा तहसील के चुली गाँव के युवक अक्षय पिलाणी उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद भारतीय पुलिस या सेना में जुड़ना चाहते थे। इस बीच उन्हें साप्ति-ध्रांगध्रा के माध्यम से पत्थर हस्तकला तथा डिजाइन में कॅरियर के अवसर के बारे में जानने को मिला। स्टोन क्राफ्ट तथा डिजाइन कोर्स में प्रवेश प्राप्त करने के बाद उनके कॅरियर को नया मोड़ मिला। ढाँचागत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अक्षय ने पत्थर की नक्काशी/उत्कीर्णन कला, चित्रकारी, प्रोडक्ट डिजाइन तथा आधुनिक मशीनरी के उपयोग के साथ परंपरागत उत्कीर्णन कला की तकनीक में भी निपुणता प्राप्त की।
कार्यक्रम में प्रशिक्षण के अतिरिक्त; उन्होंने सम्बद्ध उद्योग के व्यवसायियों के साथ काम करके व्यावहारिक अनुभव तो प्राप्त किया ही, साथ ही वित्तीय सहायता भी प्राप्त की। किसान परिवार से आने वाले अक्षय पिलाणी ने आज एक विशेषज्ञ कारीगर के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। उन्होंने चंडीगढ़ में दो बड़े स्टोन कार्विंग (पत्थर पर उत्कीर्णन) प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। आज वे हर महीने लगभग 40,000 रुपए कमाते हैं। उनकी इस यात्रा ने अन्य युवाओं को भी शिल्पकला के प्रति आकर्षित किया है।
सदियों पुरानी शिल्पकला को बनाए रखने में साप्ति की उल्लेखनीय भूमिका
साप्ति का उद्देश्य कौशल विकास, शिक्षा, नवीनता तथा उद्यमिता को प्रोत्साहन देते हुए देश की शिल्पकला को मजबूत बनाकर उसका जतन करना है। रोजगार सृजन के अलावा; साप्ति गुजरात की सदियों पुरानी पत्थर कला एवं स्थापत्य की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परंपरागत तकनीकों, आधुनिक संसाधनों और वैश्विक डिजाइन के समन्वय के साथ यह संस्थान शिल्पकला की विरासत को पुनर्जीवित करने के साथ उसे आधुनिक बाजारों के अनुकूल बना रहा है।
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