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Tuesday, March 3, 2026
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Gujarat : सोमनाथ मंदिर में स्थित बाणस्तंभ भारत की वैज्ञानिक दृष्टि, भूगोलीय समझ एवं अडिग आत्मविश्वास का प्रतीक

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति की अखंड धारा को वर्तमान एवं भविष्य के साथ जोड़ने वाला राष्ट्रीय संकल्प बनेना। ऐसे में सोमनाथ मंदिर की भव्यता के साथ वर्षों पुराना इतिहास गुँथा हुआ है। भारत की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक चेतना में सोमनाथ मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अखंड आस्था, राष्ट्रीय अस्मिता तथा संस्कृति के पुनरुत्थान का जीवंत प्रतीक है।

भारत की प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा तथा राष्ट्रीय गौरव के जीवंत केन्द्र सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत के ऐतिहासिक स्वाभिमान तथा सांस्कृतिक पुनरुत्थान की सशक्त अभिव्यक्ति समान कार्यक्रम है। इस पर्व के परिप्रेक्ष्य में मंदिर परिसर में स्थित बाणस्तंभ का विशेष ऐतिहासिक एवं प्रतीकात्मक महत्व उजागर होता है।

सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में अरब सागराभिमुख बाणस्तंभ प्राचीन भारत की वैज्ञानिक दृष्टि, भूगोलीय समझ तथा अडिग आत्मविश्वास का प्रतीक है। बाणस्तंभ पर अंकित संस्कृत शिलालेख के अनुसार (आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव, पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग) यहाँ से दक्षिण दिशा में पृथ्वी के अंत तक कोई भूखंड-भूमि नहीं है, जो तत्कालीन भारत के विद्वानों की विकसित भूगोलीय समझ को दर्शाता है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अंतर्गत बाणस्तंभ भारत के अखंड स्वाभिमान, अविरत संस्कृति तथा पुनर्जागृति के संदेश का प्रतीक है। आक्रांताओं के बारम्बार आक्रमणों और विध्वंस के बाद भी सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण तथा उससे जुड़ी विरासत भारत की अविचल आस्था तथा आत्मसम्मान को प्रतिबिंबित करते हैं।

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर प्रधानमंत्री के दृढ़संकल्प समान स्वाभिमान पर्व तक की यात्रा भारत की सांस्कृतिक पुनर्स्थापना की साक्षी है। इस परंपरा को अधिक मजबूती देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोमनाथ के प्रति व्यक्त अटूट आस्था व सम्मान राष्ट्रीय चेतना को नई ऊँचाई देते हैं। उनके नेतृत्व में समग्र देश में ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और प्रचार को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अंतर्गत बाणस्तंभ का स्मरण नई पीढ़ी को भारत के गौरवपूर्ण इतिहास के साथ जोड़ता है और आत्मविश्वास, वैज्ञानिक विचार तथा राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है। यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत के अखंड स्वाभिमान, संस्कृति एवं राष्ट्र भावना की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विशेष महत्व रखता है।

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