E-Paper
Monday, March 2, 2026
E-Paper
HomeIndiaNational : दिल्ली विश्वविद्यालय में 'गीता के माध्यम से नेतृत्व उत्कृष्टता' विषयक...

National : दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘गीता के माध्यम से नेतृत्व उत्कृष्टता’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति द्वारा ‘गीता के माध्यम से नेतृत्व उत्कृष्टता’ विषय पर दो दिवसीय 16-17 फरवरी को क्षमता संवर्धन कार्यशाला (कैपिसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप) का आयोजन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो. निरंजन कुमार ने बताया कि आज के वैज्ञानिक युग में दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति द्वारा गीता जैसे धर्म ग्रंथ पर चार कोर्सेस बनाए गए हैं।

पाठ्यक्रम निर्माण पर चर्चा करते हुए प्रो.निरंजन ने आगे कहा कि ‘गीता केवल धार्मिक ग्रन्थ नहीं है;बल्कि आधुनिक नेतृत्व और प्रबंधन की अवधारणाओं की प्रभावी व्याख्या करने वाला दार्शनिक ग्रंथ है’।उन्होंने बताया कि भारत के पहले गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स से लेकर जर्मनी के विल्हेल्म हम्बोल्ट और शोपेनहावर, अमेरिका के राल्फ इमर्सन और हेनरी डेविड थोरो और इंग्लैंड के एल्डस हक्सले आदि अनेक दार्शनिक गीता की दार्शनिक उत्कृष्टता, सार्वभौमिक अपील और आध्यात्मिक गहनता से अत्यंत प्रभावित थे। प्रो. निरंजन ने कहा कि आज इन्टरनेट और एआई के समय में जहाँ सामूहिकता खत्म होती जा रही है ऐसे में गीता हमें स्व से पर की ओर अर्थात् मनुष्यता की ओर ले जाती है। प्रो. कुमार ने कहा कि मूल रूप से हमारे भीतर एक पशु बैठा होता है जो तामसिक होता है, और गीता हमें उस तमोगुण से सतोगुण की ओर लेकर जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पाठ्यक्रमों का निर्माण बच्चों के जीवन को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार राज्य के डीजीपी डॉ. परेश सक्सेना ने गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता नेतृत्व के विविध आयामों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करती है। महाभारत के विभिन्न पात्रों के माध्यम से उन्होंने गीता में निहित नेतृत्व क्षमता को विस्तार से समझाया। जो व्यक्ति समाज का आदर्श होता है।आम जनता उसका ही अनुसरण करती है और गीता व्यक्ति के बेहतर चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।शांति,त्याग, मृदुलता,निर्भयता एवं अहिंसा आदि गुण नेतृत्व के लिए अनिवार्य हैं जो गीता हमें आत्मसात करने की प्रेरणा देती है।आधुनिक नेतृत्व के विभिन्न सिद्धांत जिन्हें आज पश्चिमी विचारधारा से जोड़ा जाता है उनके मूल तत्व गीता में पहले से ही स्पष्ट रूप में विद्यमान हैं।आज के समय में एक संतुलित समाज और समग्र नेतृत्व के निर्माण में गीता की प्रमुख भूमिका है।
कार्यशाला में प्रो.प्रभात मित्तल,प्रो.महिमा ठाकुर,प्रो. पंकज मिश्र,प्रो.रजनी साहनी,इस्कॉन के रोमी कुमार आदि ने भी संबोधित किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति शिक्षकों के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन लगातार करती रहती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments