पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन आईंरा इंटरनेशनल रिपोर्टर एसोसिएशन के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने शासन प्रशासन से मांग किया है कि पत्रकारों पर फर्जी एफआईआर दर्ज करने वाले संबंधित पुलिसकर्मी एफआईआर करवाने लोगों पर 10 लाख का जुर्माना 5 साल की सजा का प्रावधान किया जाना चाहिये गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी पत्रकारों की संरक्षण और संवर्धन की दिशा में प्रयासरत है और लगातार अपने जजमेंट में पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था संरक्षण हेतु बात करती है यहां तक देश की सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सूत्र आधारित समाचार पर समाचार पर पत्रकारों पर मानहानिकारक मामला या मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता उसके बावजूद भी छत्तीसगढ़ में धड़ल्ले से पत्रकारों के नाम को विलोपित कर फर्जी एफआईआर किए जा रहे हैं वह भी दुर्भावना से पीड़ित होकर जब कोई पत्रकार पुलिस प्रशासन के खिलाफ या भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ समाचार का प्रकाशन करता है तब संबंधित पुलिसकर्मी या वह भ्रष्ट व्यक्ति सांठगांठ कर फर्जी एफआईआर करवा देते हैं तब उस पत्रकार को काफी अपमान व पीड़ा सहना पड़ता है वह लगातार कोर्ट कचहरी के चक्कर में अनावश्यक प्रताड़ित परेशान होता है पत्रकार संगठन आईंरा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने माननीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय गृह मंत्रालय एवं देश के प्रधानमंत्री माननीय मोदी से आग्रह किया है कि फर्जी एफआईआर करने वाले पुलिसकर्मियों पर कराने वाले वाले लोगों पर 10 लाख का जुर्माना एवं 5 साल की सजा का प्रावधान किया जाए क्योंकि लोकतंत्र में मीडिया की अहम जिम्मेदारी होती है वह लोकतंत्र का चौथा आधार स्तंभ होता है फर्जी एफआईआर होने से इसकी गरिमा तार-तार हो रही है.



