धर्म जगत में बहुत समय पहले एक चर्चा चली थी की एक मंत्री ने एक संत को कांबली ओढ़ाने का चढ़ावा लाखो में लिया था। संत और नेता की मिली भगत थी, संत ने कहा की तुम कांबली ओढ़ाने का चढ़ावा ले लेना, पैसा आपको भरना नहीं है क्योंकि ये कार्यक्रम मैदान में

है तो इस में किसी संघ का नहीं मेरे प्राइवेट ट्रस्ट का प्रोग्राम है। आप बोली बोलोगे तो आप की जैन समाज में वाह वाह हो जायेगी, आप का जैनो में वर्चस्व बढ़ जाएगा की बहुत बड़े अजैन नेता को जैन धर्म के प्रति कितना प्यार है! साधु ने भी कहा की मेरा भी हमारे जैन समाज में वर्चस्व बढ़ जाएगा की ये संत कितने बड़े संत है की एक अजैन वो भी बहुत बड़े मिनिस्टर से कांबली ओढ़ाने का चढ़ावा लिया।आज तक ये बात सस्पेंस है की नेता ने पैसा भरा या नहीं ? हार्दिक हुंडिया का यही कहना है की जैन शासन के कोई भी महोत्सव होते हैं, जिस में भी बोलिया बोली जाती है वो संघ के सामने बोली जाती है, जो बोलता है उनकी रकम और नाम सब के सामने लिये जाते है फिर संघ के सामने ही महोत्सव का हिसाब दे देना चाहिये। आज कल तो एक नया ट्रेंड चला है, ट्रस्ट के ट्रस्टियों को ज़ाज़म पर कौन कौन बैठे है वो सब देख लेते है , फिर जो बोली बोले ऐसा लगता है तो उनको मंच पे आगे बिठाया जाता है , गवैया को भी समझाया जाता है की किसका नाम ज़्यादा बोलना है ! कुछ ऐसे लोग भी श्रोता के साथ बैठे है जिनको बोलिया बोलनी है लेकिन रुपया भरना नहीं है ऐसे लोग , बोलिया कैसे बढ़े और ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कैसे उनके प्राइवेट ट्रस्ट में आए वो इनका काम है । यदि कोई बोली किसी ऐसे इंसान को चली गई है जिनको पैसा नहीं भरना है , वो उनके प्राइवेट ट्रस्ट का ट्रस्टी हो , इनका काम सिर्फ बोली बढ़ाना है , भरना नहीं है फिर भी उनका नाम वहाँ गाजे बाजे के साथ लिया जाएगा। ये वो लोग है जो ट्रस्ट में ट्रस्टी है , इनको बिना ब्याज, बिना लिखापट्टी बहुत ही कम ब्याज में पैसा उनको मिलता है। वो चाहे कुछ भी करे ? उनका नाम समाज में होता है वो अलग बात है। *हार्दिक हुंडिया की देश के तमाम जैन धर्म प्रेमियों से दो हाथ जोड़कर के बिंनती है की आप जहाँ भी निर्दोष भाव से , लेकिन परमात्मा के आदर के साथ बोली बोलते है तो उनसे पूरा हिसाब भी लेना ? ताकि हमे मालूम पड़े की कुछ लोग जो रुपया लिखाते है , बोलते है वो पैसा भरते है या नहीं ? हार्दिक हुंडिया ने यह भी कहा कि जो प्रसंग धर्म के नाम होते है , इसमें गवैया को, प्रिंटर को, टेंट को , विधिकारक को , बेंड को , नृत्य करने वाले को , रसोइया को , घोड़ा बगी, फोटो वीडियो ग्राफर , मीडिया को , अखबार में जाहिरात के , इवेंट मार्केटिंग वाले को , हाथी , घोड़ा , बैल गाड़ी , सोशियल मीडिया द्वारा प्रचार जैसे जो भी चीजों का उपयोग होता है उनका कितना खर्च हुआ और कितनी इनकम हुई ? ये हिसाब ट्रांसफर होना चाहिये , ताकि समाज को ये भी मालूम पड़े की कितने लोगो ने बोलियां बोली और कितने लोगो ने रूपिया भरा और जो भी खर्चा हुआ है वो लोगो को मालूम पड़े ? वो समाज का पैसा खर्च करने वाले को ये भी कह सकते है की देखो आपने ने इस में ज़्यादा रुपया दिया है तो वो दूसरी बार ज़्यादा खर्च ना हो वो सभी का ध्यान रहता है और समाज का रुपया बचता है इस लिए हार्दिक हुंडिया ने कहा दानवीरों इस लिए रुपया लिखाते है की एक तो उनकी धर्म की प्रभावना करने को भावना , उनको लगता है की पैसे सही जगह सही काम में उपयोग हो। रुपया जब अच्छे कामो और कार्यो के लिए देते है तो उनका सही उपयोग होना जरूरी है । हिसाब से कोई ग़लत खर्च या ज़्यादा गया हो तो मालूम पड जाएं इसलिए समाज के सामने हिसाब रखना जरूरी है।


