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Monday, March 2, 2026
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National : रायपुर की कार्रवाई से उजागर हुई फूड विभाग की संदिग्ध भूमिका – अशोक फड़नवीस

छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रायपुर के फूड अधिकारियों द्वारा नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री पर की गई छापेमारी ने न केवल मिलावट के खतरनाक खेल को उजागर किया है बल्कि राजनांदगांव फूड विभाग की भूमिका पर भी संदेह की गहरी छाया डाल दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक फड़नवीस ने इस पूरे मामले को विभागीय मिलीभगत का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। खाद्य सुरक्षा नियम अधिनियम 2006 के तहत के तहत फैक्ट्री मालिक और विभाग के फूड इंस्पेक्टर भी नियमानुसार दोषी है। संविधान के अनुसार इन्हें दोषी मानते हुए प्रथम दृष्टि में प्रमुख दोषी है इन पर भी अपराधिक मामला बनता है तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।


रायपुर फूड विभाग की टीम द्वारा नकली पनीर निर्माण करने वाली फैक्ट्री पर की गई कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि मिलावट का यह कारोबार किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक फड़नवीस ने आरोप लगाया कि फूड विभाग की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा अवैध व्यवसाय फल-फूल ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव का फूड विभाग जहां एक ओर मासिक उगाही में व्यस्त रहा, वहीं दूसरी ओर आम जनता की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ होता रहा। नकली पनीर के माध्यम से न जाने कितने परिवारों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला गया बच्चों और जिम जाने वाले युवाओं को जहरीला पनीर खिलाया गया। फड़नवीस ने सवाल उठाया कि यदि रायपुर की टीम समय पर आकर कार्रवाई नहीं करती, तो यह अवैध फैक्ट्री शायद आज भी धड़ल्ले से नकली पनीर का उत्पादन कर रही होती। प्रोटीन की अधिक मात्रा के कारण पनीर बच्चों और युवाओं की पहली पसंद होता है ऐसे में मिलावटी पनीर का बाजार में खुलेआम बिकना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि फूड विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पूरी तरह संदेह के घेरे में है। पनीर ही नहीं बल्कि ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जो आम लोग रोजमर्रा के जीवन में उपयोग करते हैं, लेकिन उन पर जांच कब होती है यह सुनने में ही नहीं आता। विभाग के अधिकारी केवल वसूली में लगे रहते हैं और लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को संरक्षण देते हैं।।इस पूरे मामले में अशोक फड़नवीस ने स्पष्ट मांग की कि केवल फैक्ट्री मालिक ही नहीं बल्कि फूड विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और इस घातक कारोबार को पनपने दिया।

हेमंत वर्मा संवाददाता राजनांदगांव

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