डिजिटल दौर एव खेलने की उम्र में तप का उज्ज्वल उदाहरण: बालिका का वर्षीतप समाज के लिए प्रेरणा
पहले भी बन चुका है प्रेरणादायक उदाहरण –
नागदा ( राजेश सकलेचा )
आज की चकाचौंध, खान-पान और डिजिटल दुनिया के दौर में जहां बच्चे अपना अधिकांश समय मनोरंजन और तकनीक में बिताते हैं, वहीं नागदा स्थानकवासी जैन समाज की एक बालिका ने तप और संयम का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
कम उम्र में महान तप का संकल्प
नागदा के मनीष–सेजल चपलोत परिवार की सुपुत्री सुदिक्षा चपलोत (लगभग 13 वर्ष) इन दिनों जैन धर्म के अत्यंत कठिन और महान तप वर्षीतप की साधना कर रही हैं। इतनी कम उम्र में इस प्रकार का कठिन तप करने का संकल्प लेना असाधारण आत्मबल और दृढ़ निश्चय का परिचायक माना जा रहा है। समाज के लोग इसे गर्व और प्रेरणा की दृष्टि से देख रहे हैं।
लगभग 396 दिनों तक चलने वाला कठिन तप
जैन धर्म में वर्षीतप को सबसे बड़ा और कठिन तप माना जाता है। यह तप लगभग 13 महीनों तक चलता है और करीब 396 दिनों में पूर्ण होता है। इस दौरान साधक एक दिन उपवास और एक दिन पारणा करता है। कई बार इसके बीच बेले-तेले जैसी अतिरिक्त कठोर तपस्याएं भी की जाती हैं, जो साधक के धैर्य और आत्मसंयम की परीक्षा लेती हैं।

मर्यादित आहार और कठोर अनुशासन
वर्षीतप के दौरान साधक सामान्य भोजन का सेवन नहीं करता, बल्कि अत्यंत मर्यादित और शुद्ध आहार ग्रहण करता है। कई बार इसमें केवल धोवन जल या उबला हुआ पानी ही लिया जाता है। इस प्रकार का तप न केवल शारीरिक सहनशक्ति, बल्कि मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक समर्पण की भी परीक्षा लेता है।
समाज में श्रद्धा और उत्साह का माहौल
नागदा स्थानक जैन समाज में इस तप को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। समाज के अनेक लोग समय-समय पर उपस्थित होकर बालिका का उत्साहवर्धन कर रहे हैं। धार्मिक प्रवचन, सामूहिक प्रार्थना और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से पूरे समाज में सकारात्मक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिल रहा है।
बचपन से जुड़े धार्मिक संस्कार
परिवार के सदस्यों के अनुसार सुदिक्षा बचपन से ही धार्मिक संस्कारों से जुड़ी रही हैं और उन्हें जैन धर्म की शिक्षाओं में विशेष रुचि रही है। परिवार और समाज के मार्गदर्शन में उन्होंने यह कठिन तप करने का संकल्प लिया और अब पूरी निष्ठा और दृढ़ता के साथ इसे पूर्ण करने की ओर अग्रसर हैं। पूर्व मे भी सुदिक्षा ने अठ्ठाई तप की तपस्या भी पुर्ण करी वही दुसरी और एक नजर मे देखा जाय तो चपलोत परिवार सदेव धर्म आराधाना के क्षेत्र मे अग्रणी रहता है
पहले भी बन चुका है प्रेरणादायक उदाहरण
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019–20 में भी स्थानक समाज की बालिका तनीशा सकलेचा (वर्तमान में तनीशा नाहर) ने कम उम्र में वर्षीतप एव सिद्धि तप पूर्ण कर समाज में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया था। अब सुदिक्षा चपलोत उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
चलते चलते –
सकलेचा, गेलडा ( हेदराबाद ) एव नाहर परिवार ऐसे विरले तपस्वीयो के तप की बारम्बार अनुमोदना करते है । नागदा से संवाददाता जीवनलाल जैन की रिपोर्ट। 9179662633


