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Monday, March 2, 2026
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Nartional : “बीजेपी गौ-रक्षा कानून नहीं बना पाई, अब गौ माता को देसी-विदेशी में बाँटकर अपनी नाकामी छुपा रही है” : स्वामी चक्रपाणि जी महाराज

अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा है कि यह देश और सनातन धर्म का दुर्भाग्य है कि वर्षों से हिंदू समाज द्वारा माँगे जाने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी गौ-रक्षा कानून नहीं बना पाई, लेकिन अपनी प्राथमिकताएँ बदलकर अन्य विषयों पर कानून बना दिए गए। अब इसी नाकामी और निकम्मेपन को छुपाने के लिए गौ माता को देसी-विदेशी नस्लों में बाँटने का कुतर्क सामने लाया जा रहा है।

स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी द्वारा टीवी चैनल पर दिया गया बयान—जिसमें गोवा में हो रही गौहत्या को यह कहकर जायज़ ठहराने का प्रयास किया गया कि कटने वाली गाय “विदेशी नस्ल” की है—सनातन धर्म, शास्त्रों और करोड़ों गौभक्तों की भावनाओं का खुला अपमान है। यह बयान गौ-रक्षा कानून पर सरकार की विफलता से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि ऋग्वेद में स्पष्ट लिखा है—“गावो विश्वस्य मातरः”, अर्थात गौ संपूर्ण विश्व की माता है। शास्त्रों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि केवल देशी नस्ल की गौ माता है और विदेशी नस्ल की गौ काटी जा सकती है। गौ को नस्ल के आधार पर बाँटना घोर अधर्म, बौद्धिक छल और पाप को वैध ठहराने की साजिश है। गौ की हत्या ही नहीं, उसका अपमान भी पाप है—यह सनातन का स्पष्ट सिद्धांत है।

स्वामी जी ने कहा कि यदि वास्तव में सरकार गौ-रक्षा चाहती, तो देशी-विदेशी का प्रश्न ही नहीं उठता, बल्कि किसी भी गौ की हत्या को अपराध घोषित कर केंद्रीय गौ-रक्षा कानून बनाया जाता। वास्तविकता यह है कि आज एक ऐसा तंत्र खड़ा कर दिया गया है जिसमें गोरक्षकों को अपराधी और गौ-तस्करों को संरक्षण मिलता दिखता है। इसी कारण आज गौ-रक्षा के बजाय गौ को बाँटने वाली भाषा सुनाई दे रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का विश्व में बड़े पैमाने पर गौ-मांस निर्यातक बनना सत्ता की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। गौ माता के पाप से कोई भी राजनीतिक दल नहीं बचेगा। यह विषय बयानबाज़ी का नहीं, कानून और नैतिक साहस का है।

स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने मांग की कि सुधांशु त्रिवेदी तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी माँगें, यह स्पष्ट करें कि किसी भी नस्ल की गौ की हत्या अस्वीकार्य और अधर्म है, तथा सरकार तुरंत केंद्रीय गौ-रक्षा कानून की दिशा में ठोस कदम उठाए। उन्होंने समस्त संत समाज और हिंदू संगठनों से एकजुट होकर गौ-रक्षा के लिए निर्णायक आंदोलन करने का आह्वान किया।

गौ माता को बाँटना—धर्म को तोड़ना है।
और जो धर्म तोड़ेगा, इतिहास उसे क्षमा नहीं करेगा।

स्वामी चक्रपाणि जी महाराज

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