आज से लगभग 62 वर्ष पहले, सन् 1963 में, उस समय गुजरात के एकमात्र पीएच.डी. धारक गणितज्ञ प्रो. पी. सी. वैध साहेब द्वारा गुजरात गणित मंडल की स्थापना की गई थी। तब से लेकर आज तक मंडल द्वारा गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर गणित अधिवेशन, सेमिनार, कार्यशालाएँ तथा विभिन्न गणितीय गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहा है।
इस वर्ष आयोजित अधिवेशन के दौरान कुल 17 व्याख्यान आयोजित किए गए, जिनमें वैदिक गणित, नई शिक्षा नीति (NEP), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गणित में भारत का योगदान, गणित समाचार, प्रश्न-संध्या तथा प्रतियोगिताओं जैसे विषय शामिल थे।
इसके अतिरिक्त, स्कूल और कॉलेज विभाग के लिए दैनिक जीवन में गणित, मिरर मैजिक स्क्वेयर, मैजिक ऑफ डाइस, मैप थ्योरी, डिटरमिनेंट्स तथा “ग्राफ से गूगल तक की यात्रा” जैसे विषयों पर कुल 20 व्याख्यान आयोजित किए गए।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सन् 2003 में गुजरात विद्यापीठ में मंडल का 40वाँ अधिवेशन आयोजित किया गया था। इस वर्ष के अधिवेशन में गुजरात के विभिन्न जिलों से 300 से अधिक गणित शिक्षक, प्रोफेसर, विद्यार्थी और गणित प्रेमियों ने भाग लेकर अपनी गणितीय प्रतिभा का प्रदर्शन किया।अधिवेशन का उद्घाटन मंडल के आजीवन सदस्य तथा राज्य के पूर्व मंत्री श्री पुरुषोत्तमभाई रुपाला साहेब द्वारा किया गया। अधिवेशन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी श्रृंखला में विभिन्न गणितीय मॉडल और प्रयोग गणितज्ञों के लिए प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह चुडासमा साहेब के करकमलों द्वारा पिछले दो वर्षों में गणित विषय में पीएच.डी. पूर्ण करने वाले 25 से अधिक विद्यार्थियों तथा उनके मार्गदर्शकों का सम्मान किया गया।मंडल के 63 वर्षों के इतिहास में सेवा देने वाले 15 से अधिक पूर्व अध्यक्षों का सम्मान गुजरात विद्यापीठ के कुलपति एवं गुजरात गणित मंडल के अध्यक्ष डॉ. हर्षदभाई पटेल द्वारा किया गया।तीन दिनों के दौरान गणित प्रेमियों ने गणित क्षेत्र की उपलब्धियों, नवीन समाचारों तथा शोध संबंधी जानकारियाँ प्राप्त कर अपने ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि की। उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि इस अधिवेशन में 12 वर्ष के विद्यार्थियों से लेकर 82 वर्ष के प्रोफेसरों तक के वक्ताओं ने अपने गणितीय ज्ञान और अनुभव साझा किए।


