सनातन धर्म में गंगा नदी को मोक्षदायिनी मां का स्थान प्राप्त है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था की केंद्र मां गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की जीवनधारा हैं। काशी की पावन धरती, जहां काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है और जहां भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है, वहां गंगा के पवित्र जल को दूषित करने का प्रयास अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।अखिल भारत हिंदू महासभा एवं संत महासभा के अध्यक्ष तथा श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के जगतगुरु सनातन सम्राट स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि जी महाराज ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मां गंगा को अपवित्र करने का दुस्साहस करने वाले लोगों ने न केवल करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था को आहत किया है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के साथ भी गंभीर अपराध किया है।
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि शास्त्रों में मां गंगा को पवित्रता, मोक्ष और दिव्यता का प्रतीक माना गया है। जो लोग मां गंगा को दूषित करने का प्रयास करते हैं, वे न केवल समाज और धर्म के विरुद्ध कार्य करते हैं बल्कि ऐसे लोग अपने कर्मों के कारण धर्मशास्त्रों के अनुसार नरक के भागीदार भी बनते हैं।उन्होंने कहा कि मां गंगा को दूषित करने का कृत्य अक्षम्य अपराध है और ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि इस प्रकार का कृत्य न केवल धार्मिक दृष्टि से घोर पाप है बल्कि कानून भी उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करेगा।
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि देश में ऐसा कठोर कानून बनाया जाना चाहिए, जिससे कोई भी व्यक्ति या समूह किसी भी धर्मस्थल—विशेष रूप से मां गंगा जैसी पवित्र नदी—को अपवित्र करने का साहस न कर सके। जो भी व्यक्ति मां गंगा को दूषित करने का प्रयास करेगा, उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार का दुस्साहस करने की हिम्मत न कर सके।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज सदैव सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करता आया है, किंतु हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कृत्यों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मां गंगा भारत की आध्यात्मिक धरोहर हैं और उनकी पवित्रता की रक्षा करना पूरे राष्ट्र का कर्तव्य है।अखिल भारत हिंदू महासभा ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि मां गंगा सहित सभी पवित्र नदियों और हिंदू धर्मस्थलों की रक्षा और पवित्रता बनाए रखने के लिए कठोर कानून बनाया जाए और इस घटना में शामिल लोगों के विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
अंत में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि जी महाराज ने कहा कि मां गंगा को अपवित्र करने वालों को देश कभी क्षमा नहीं करेगा और ऐसे लोगों को कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना ही चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मां गंगा की पवित्रता को दूषित करने का साहस न कर सके।
स्वामी जी ने घोषणा की कि हिंदू समाज को जागरूक करने और सनातन आस्था की रक्षा के उद्देश्य से शीघ्र ही पूरे देश में “हिंदू स्वाभिमान यात्रा” निकाली जाएगी, जिसके माध्यम से समाज को सनातन धर्म, राष्ट्र और आस्था के प्रति सजग रहने का संदेश दिया जाएगा।


