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National : परमधाम हनुमान मंदिर ट्रस्ट, विजय घाट, दिल्ली के तत्वावधान में श्री हनुमान जन्मोत्सव महोत्सव 2026 अत्यंत भव्य एवं दिव्य रूप से सम्पन्न हुआ।

दिल्ली। परमधाम हनुमान मंदिर ट्रस्ट, विजय घाट, दिल्ली के तत्वावधान में श्री हनुमान जन्मोत्सव महोत्सव 2026 अत्यंत भव्य एवं दिव्य रूप से सम्पन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य महंत श्री मुनेश्वर गिरि जी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।


इस अवसर पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के जगद्गुरु पूज्य स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि जी महाराज की विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
साथ ही जूना अखाड़ा के उपाचार्य पूज्य श्री गोकर्ण पीठाधीश्वर स्वामी कपिल गिरि जी महाराज का भी गरिमामयी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
इसके अतिरिक्त इस पावन अवसर पर
जगद्गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज
आनंद अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद जी महाराज
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि जी महाराज
जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता महंत श्री नारायण गिरि जी महाराज
तथा अन्य अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का सफल संचालन महामंडलेश्वर महंत श्री नवल किशोर दास जी महाराज द्वारा किया गया, जबकि आयोजन का कुशल आयोजन श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव स्वामी कंचन गिरि जी महाराज ने किया।
इस अवसर पर महंत मुन्ना गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी नलिदानंद गिरि जी महाराज सहित अनेक संतों ने सहभागिता की एवं अपने विचार व्यक्त किया उसी श्रृंखला में
जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा—
“भगवान श्री हनुमान जी के जीवन में शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है, परंतु उनमें अहंकार का लेश मात्र भी नहीं था। उनका जीवन ‘राम काज’ के लिए पूर्ण समर्पित था।”
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेकर सेवा, समर्पण और विनम्रता को अपनाएं,सनातन सिद्धांत ही विश्व शांति का मार्ग
जगद्गुरु जी ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जिस प्रकार अशांति और संघर्ष से गुजर रहा है, उसका समाधान केवल सनातन के सिद्धांतों में निहित है—
“सर्वे भवन्तु सुखिनः, वसुधैव कुटुम्बकम्”
इन विचारों को जन-जन तक पहुंचाना ही सच्ची सेवा है।
जगद्गुरु जी ने आगे कहा कि मुगलों और अंग्रेजों के समय भी अखाड़ों के पूज्य संतों ने सनातन परंपराओं की रक्षा की।
1760 में अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण के समय नागा साधुओं ने धर्म की रक्षा के लिए अद्भुत साहस का परिचय दिया।जगद्गुरु जी ने देश धर्म के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी संतों के श्रीचरणों में नमन करते हुए कहा—
“संत त्याग, तपस्या और धर्म के साक्षात प्रतीक हैं।”
इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने आयोजनकर्ता स्वामी कंचन गिरि जी महाराज का सभी पूज्य वरिष्ठ संतो के साथ सम्मान किया और उनके सफल आयोजन की सराहना की, जगद्गुरु जी ने वहां उपस्थित जन समुदाय को संकल्प दिलाया की सनातन धर्म का अलग पूरे विश्व में झंझट तक पहुंचाएंगे एवं हनुमान जी के आदर्शों पर चलते हुए धर्म की, मठ मंदिर आश्रम गुरुकुलो की रक्षा करेंगे , अंत में जय बजरंगबली के नारे के साथ कार्यक्रम का विश्राम हुआ यह कार्यक्रम परमधाम हनुमान मंदिर ट्रस्ट, विजय घाट, दिल्ली पर श्री हनुमान जन्मोत्सव आयोजित हुई थी,

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