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Monday, March 2, 2026
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Gandhinagar : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने देश की सर्वप्रथम सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित सार्वजनिक वितरण व्यवस्था का शुभारंभ किया

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने रविवार को गांधीनगर से देश की सबसे पहली सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित पारदर्शी, आधुनिक और सरल सार्वजनिक वितवरण व्यवस्था (पीडीएस) का शुभारंभ किया।

महात्मा मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी मौजूद रहे। इस समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने 1 किलो के सीलबंद पैक में चना और अरहर दाल के वितरण, अहमदाबाद के साबरमती जोन में अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम सुविधा और ‘गरिमा पोषण-सुपोषित गरुड़ेश्वर तालुका’ अभियान का शुभारंभ किया।

इसके अलावा, गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा उपभोक्ता शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (सीईआरसी) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू से शिकायतों के निपटारे के लिए प्री-लिटिगेशन इकोसिस्टम विकसित होगा, जिससे अदालतों के बाहर ही विवादों का निपटारा हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, ‘उपभोक्ता उत्तरदायित्व सूचकांक’ (सीआरआई) तैयार करने के लिए भी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा ‘केयर रेटिंग’ और उपभोक्ता शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने वाली विभिन्न परियोजनाओं के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सभी लोगों को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से आज ‘डिजिटल इंडिया’ का विस्तार सार्वजनिक वितरण व्यवस्था तक पहुंच गया है। एक दशक पहले देश के 60 करोड़ लोगों के परिवार में एक भी बैंक खाता नहीं था, लेकिन आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत डिजिटल ट्रांजेक्शन के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है और दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन में से आधे भारत में हो रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के बारे में बात करते हुए कहा कि अब गरीबों को रियायती अनाज देने की दिशा में भी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन साकार हो रहा है। जिसके अंतर्गत सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) प्रोजेक्ट और ‘मेड इन गुजरात’ जैसी टेक्नोलॉजी आधारित व्यवस्था से भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी, इससे सुदूरवर्ती गांवों, आकांक्षी जिलों और पिछड़े इलाकों में रहने वाले नागरिकों को उनके अधिकार का पूरा अनाज सीधे और पारदर्शी तरीके से मिलेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सीबीडीसी प्रोजेक्ट में शामिल सभी संस्थानों और केंद्र एवं राज्य के विभागों को बधाई देते हुए कहा कि यह आधुनिक व्यवस्था प्रधानमंत्री के मंत्र ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ को सही मायने में चरितार्थ करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत आज देश के 81 करोड़ लोगों को सरकार की ओर से मुफ्त राशन दिया जा रहा है। उन्हें मिलने वाली खाद्य सुरक्षा अब डिजिटल और पारदर्शी बन गई है।

आज प्रारंभ किए गए ग्रेन एटीएम, अन्नपूर्ति मशीन और दाल की नई पैकिंग तथा गरिमा पोषण सहित जैसे प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने इन्हें गरीबों को अन्न सुरक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न क्रांतिकारी पहलें करार दिया।

श्री शाह ने कहा कि अन्नपूर्ति मशीन से केवल 35 सेकेंड में 25 किलो अनाज का वितरण संभव हो पाएगा, जो वजन, मूल्य और गुणवत्ता की दृष्टि से पूरी तरह से सटीक होगा। आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सीबीडीसी और रिजर्व बैंक के पेमेंट सिस्टम से जुड़ी यह व्यवस्था अगले तीन-चार वर्षों में पूरे देश में लागू की जाएगी, जिससे देश भर के गरीबों को उनके अधिकार का गुणवत्तापूर्ण राशन तय समय पर पूरी पारदर्शिता के साथ मिलेगा।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न योजनाओं के सफल कार्यान्वयन से गरीब और अंतिम छोर के नागरिकों का सर्वांगीण विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ घरों का निर्माण, 13 करोड़ घरों में नल से जल कनेक्शन, लगभग 13 करोड़ घरों में गैस सिलेंडर और 12 करोड़ घरों में शौचालय की उपलब्धता के साथ ही 2.91 करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं, जो सरकार की योजनाओं और अभियानों की सफलता को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना जैसी विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए उनकी सफलता के आंकड़े बताए। उन्होंने कहा कि लोगों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने और उन्हें गरीबी से बाहर निकालने में ये योजनाएं महत्वपूर्ण साबित हुई हैं।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने किसानों और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए दृढ़तापूर्वक कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों के कल्याण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है। पिछले एक दशक में किसानों से समर्थन मूल्य अनाज की खरीदी में 15 गुना वृद्धि हुई है और कृषि बजट भी 26,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1,29,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भी भारत के डेयरी, कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र को संपूर्ण सुरक्षा कवच दिया गया है, जिससे भारतीय उत्पादों के लिए दुनिया के बाजार खुल जाएंगे।

अंत में केंद्रीय गृह मंत्री ने सीबीडीसी और पारदर्शी वितरण व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट के लिए गुजरात का चयन करने के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और गुजरात सरकार को बधाई दी और इस लीक-प्रूफ सिस्टम को विकसित भारत का ब्लू प्रिंट करार दिया।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में ‘जो कहना, वह करना’ के मंत्र के साथ देश में जनकल्याण का एक नया इतिहास रचा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने ‘ज्ञान’ अर्थात गरीब, युवा, महिला और अन्नदाता के सशक्तिकरण के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव रखी है।

मुख्यमंत्री ने टेक्नोलॉजी के परिवर्तनकारी प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब भारत में डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों के मन में शक-संदेह था, उन शंकाओं को दूर कर आज भारत दुनिया में सबसे बड़े यूपीआई यूजर के रूप में जाना जाता है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिवेणी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डेटाबेस कनेक्टिविटी के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे और विश्वसनीयता के साथ लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। आहार, आवास, आरोग्य और आय के स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करने के परिणामस्वरूप पिछले एक दशक में देश के 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब अनाज प्राप्त करने के लिए ‘ग्रेन एटीएम’ कार्यरत होंगे। इस एटीएम से केवल 35 सेकेंड में 25 किलो अनाज का वितरण संभव होगा और ये 24 घंटे कार्यरत रहेंगे। इस सुविधा के कारण विशेष रुप से श्रमिक और मजदूर वर्ग अपने कार्य समय के घंटों के बाद भी किसी भी समय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने योग्य गेहूं, चावल और दाल प्राप्त कर सकते हैं, जो हाशिए पर खड़े लोगों के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध होगा।

सीबीडीसी आधारित सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी के माध्यम से लाभार्थियों को डिजिटल टोकन के द्वारा सब्सिडी, वस्तु का वजन और उसकी कीमत की सटीक जानकारी मिलेगी। इस डिजिटल ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग के कारण योजना के लाभों में 100 फीसदी पारदर्शिता आएगी और ‘सेचुरेशन एप्रोच’ यानी प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुंचने का सरकार का संकल्प सही मायने में साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि हाल ही में अमूल एआई द्वारा पशुपालकों को एआई टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने के बाद अब सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में टेक्नोलॉजी का यह प्रयोग एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मंत्र ‘सेवा ही साधना’ का अनुसरण करते हुए टेक्नोलॉजी के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाकर वर्ष 2047 तक ‘विकसित गुजरात से विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।

केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने सभी को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीबीडीसी आधारित यह केवल टेक्नोलॉजी ऐप और पोर्टल ही नहीं है, बल्कि इससे सभी जरूरतमंदों लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को उनके अनाज प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े खाद्य कार्यक्रम को इस नई पहल से विशेष बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि अनाज वितरण व्यवस्था को इस टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना एक चुनौती थी, लेकिन ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत यह कार्य बहुत आसान बन गया।

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने कहा कि देश भर में राशन कार्ड का डिजिटलीकरण होने से ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ की संकल्पना साकार हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पहल से शुरू हुई डिजिटल कूपन के जरिए लाभार्थी किसी भी समय ग्रेन एटीएम पर जाकर क्यूआर कोड स्कैन करके अनाज प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा, साधारण फीचर फोन उपयोगकर्ता लाभार्थी को भी एसएमएस के जरिए प्राप्त ओटीपी से अनाज की सुविधा दी जाएगी।

श्री जोशी ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी के लागू होने से लगभग दो से तीन करोड़ फर्जी राशन कार्ड रद्द हो चुके हैं। सीबीडीसी आधारित व्यवस्था शुरू होने से वास्तविक लाभार्थी को ही उसका लाभ मिलेगा। इस अनाज की डिजिटल रकम लाभार्थी के वॉलेट में जमा होने से वह इसके जरिए उचित मूल्य की दुकान और ग्रेन एटीएम से अनाज की खरीदी कर सकेगा, जबकि अन्य स्थानों पर इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। इस डिजिटल आधारित अनाज वितरण प्रक्रिया की गुजरात से शुरुआत होने से देश के बाकी राज्यों में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और जाली राशन कार्ड भी अपने तरीके से समाप्त हो जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रियायती अनाज वितरण में सीबीडीसी आधारित व्यवस्था साबरमती नदी के किनारे गरीबी के खिलाफ ‘डिजिटल सत्याग्रह’ साबित होगी, जिससे कालाबाजारी पर भी और रोक लगेगी और जरूरतमंद लाभार्थी तक अनाज तेजी से पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रयोग को आगामी समय में देश भर में लागू किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी
उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ने कहा कि देश की डिजिटल करेंसी गरीब की थाली तक अनाज पहुंचाएगी। आज गुजरात की धरती पर एक बार फिर एक नया इतिहास रचने जा रहा है। हम सभी हम सभी लोग एक ऐसी क्रांति के गवाह बनने जा रहे हैं, जो केवल गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की दिशा और दशा बदल देगी।

श्री संघवी ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में ‘खाद्य सुरक्षा’ हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। अतीत में सरकारी अनाज लाभार्थी तक पहुंचने से पहले बिचौलियों तक पहुंच जाता था और राशन की दुकानों पर लंबी कतारों जैसे समस्याएं देखने को मिलती थीं। सीबीडीसी आधारित पीडीएस प्रोजेक्ट इन सभी समस्याओं का स्थायी रूप से समाधान करेगा।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर नई टेक्नोलॉजी का पहला लाभ बड़े उद्योगपतियों को मिलता है, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने एक राह दिखाई है। ‘डिजिटल करेंसी’ जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी का सबसे पहला उपयोग गरीब की थाली तक भोजन पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। अब, लाभार्थियों को दुकानदारों की राह देखने की आवश्यकता नहीं होगी। चौबीसों घंटे, किसी भी वक्त ग्रेन एटीएम पर जाकर केवल 5 मिनट में ही अनाज प्राप्त किया जा सकता है। इस व्यवस्था में वजन में 1 ग्राम का भी अंतर नहीं होगा, जो डिजिटल इंडिया का उत्तम उदाहरण है। सीबीडीसी, ग्रेन एटीएम और बायोमेट्रिक जैसी टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ रहा गुजरात का यह मॉडल आगामी समय में देश के लिए पथप्रदर्शक बनेगा और पात्र लोगों को उनका अधिकार पारदर्शी तरीके से और बिना किसी परेशानी के मिलेगा।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव सुश्री मोना खंधार ने स्वागत भाषण में पूरे कार्यक्रम और नए प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत डिजिटल क्रांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी ई-रूपी की घोषणा के साथ देश में आधुनिक फिनटेक के एक नए युग की शुरुआत हुई, जिसका नेतृत्व करने के लिए गुजरात तैयार है।

कार्यक्रम में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन बांभणिया, गुजरात के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री रमणभाई सोलंकी, राज्य मंत्री श्री पी.सी. बरंडा, गांधीनगर की महापौर श्रीमती मीराबेन पटेल, कई सांसद और विधायक, भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव श्री संजीव चोपड़ा, भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक श्री पी. वासुदेव, पंजाब नेशनल बैंक के कार्यकारी निदेशक श्री डी. सुरेन्द्रन और केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में लाभार्थी उपस्थित रहे।

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